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Saturday, April 23, 2022

गंगा की वेदना - हिंदी कविता

गंगा की वेदना

गंगा की वेदना

दया तुझमें, कृपा मुझमें, माता-पिता तू ही मेरी,

मेरा मजहब, मेरा सरहद, हैं जात तू ही मेरी।

इस ज़मीन से आसमान तक

फैली विशाल धारा तेरी

थकती नही, रूकती नही ,

बहती रेहती गंगा मेरी।।